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Nonu- Four Months

Nonu has come back to her home, and she has grown up so much. She now truely recognizes her baba, and two days back leapt for the first time into his arms, back in Indore.
She has become very active, the cold she caught is fading now, thanks to the medicine by Dr. Balan. Nonu has become very active. Tries to talk to us all her waking hours and keeps on trying to sit up and stand. Now she has even started to try to crawl. I hope, this courage and conviction which helps her pick herself up every time she fails to sit up, will always be with her in the times to come. She has grown very close to her mother, they talk to each other for hours and no one can really understand what she talks about.

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बाल विवाह - हिंदू इतिहास और सत्य

  इतिहास का लेखन उसकी विसंगतियों की अनुक्रमिका नहीं वरन उसके समाज के आम रूप से स्वीकृत मान्यताओं एवं उस समाज के जननायकों द्वारा स्थापित मानदंडों के आधार पर होना चाहिए। परंतु जब लेखनी उन हाथों में हो जिनका मंतव्य शोध नहीं एक समाज को लज्जित करना भर हो तो समस्या गहन हो जाती है। जब प्रबुद्ध लोग कलम उठाते हैं और इस उद्देश्य के साथ उठाते हैं कि अप्रासंगिक एवं सदर्भहीन तथ्यों के माध्यम से समाज की वर्ग विभाजक रेखाओं को पुष्ट कर सकें तो हमारा कर्तव्य होता है कि हम सत्य को संदर्भ दें और अपने इतिहास के भले बुरे पक्षों को निर्विकार भाव से जाँचें।   बीते सप्ताह बाल विवाह को लेकर विदेशी सभ्यता में उठे प्रश्नों को भारत की सभ्यता पर प्रक्षेपित करके और उसकी स्वीकार्यता स्थापित करने पर बड़ी चर्चा रही। इस संदर्भ में   श्री ए एल बाशम से ले कर राजा राम मोहन रॉय तक चर्चा चली। बाशम की पुस्तक द वंडर दैट वाज इंडिया - को उद्धृत कर ले कहा गया कि हिं

दो जोड़ी नन्ही आँखें

अनदेखे ख़्वाबों की दो जोड़ी नन्हीआँखें, जिन्होंने स्वप्न देखने की आयु से पूर्व दु:स्वप्न देख आँखें मूँद लीं। जो क़दम अभी चलना ही सीखे थे, लड़खड़ा कर थम गए। बचपन के घुटने पर लगी हर खरोंच, व्यस्कों के गाल पर एक तमाचा है। धर्म के आडंबरों से अछूता बाल मन जो मंदिरों और मस्जिदों को अपनी आत्मा में रखता था, धर्म की दरारों पर अपना नन्हा शव छोड़ निकल पड़ा। कहीं दूर,दग्ध शरीर के ताप से दूर, जब यह अकलुषित हृदय पहुँचा तो एक और निष्पाप दूधिया आत्मा दिखी, जिसकी पलकों के कोरों में उसकी आँखों के जैसे ही अविश्वास से सहमा हुआ अश्रु रूका था। एक दूसरे के गले लग कर दोनों बाल मन दरिया के टूटे बाँध की तरह बह निकले। घाव बाँटे, एक दूसरे के हृदय में चुभी धरती की किरचें निकाली और न देखे हुए स्वप्नों का श्राद्ध रचा। उसने थमती हिचकियों में अपना नाम बताया - ‘आसिफा’। और दुख के साथी की ठोड़ी थाम कर कहा - ‘मत रो, न्याय होगा।’ धरती की तरफ़ नन्ही गुलाबी उँगली दिखा कर कहा- “देख, भले लोग लड़ रहे है मेरे लिए, न्याय होगा। तेरे लिये भी लड़ रहे होंगे। तू मत रो” फिर बोली, “मैं पश्चिम से हूँ, तू पूरब से, पर हैं

The Great Shake in Governance- New Modi Cabinet- My Take

This week, the Narendra Modi government was expanded. However, as it turned out, it was not merely an expansion, rather complete rehash of the cabinet, with many faces, widely believed as non-performers eased out of their positions.  The expansion came with the dropping of some key names, much famed and widely seen on TV Channels, perceived to me closest to the leftist media houses. Prakash Javadekar was shunted, Ravishankar Prasad was dropped, so was Ramesh Pokhariyan Nishank. Apart from the worthies of Ministries of Information & Broadcasting, Law and IT and HRD, Dr. Harshvardhan was also dropped from health.  Before we look at the addition, it is pertinent to look at the deletions from the earlier Cabinet. Prakash Javadekar, as I&B Minister was expected to take strong stand, make statements, blast the inane propaganda in key policy initiatives that the Modi Government was taking. From Land Acquisition Bill to Demonetization to GST to Triple Talaq to CAA to Farmer's Bill-