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Nonu's first fall


(First written on my cell, on 11/10/08, date of event)

In over enthusiasm to practice her new found ability of taking a double turn on the bed; trying a trick newly learnt, using an unattended moment from her ever so watchful Ma, Nonu had her first fall from the bed. While our hearts were in our respective mouths and we did what we could under the circumstances in our adult wisdom, I shouted, her mother sobbed, while the small bundle which precipitated the catastrophe was back to her usual toothless grin and playful charms in not more than a minute of being held in the comfort of her mother's arms. A big truth gapes at me, how idiotic we adults respond to crisis, shouting like crazy, and crying like a wimp, and the child responds with a resilience and a will to move on without blaming anyone. I know, no matter how much I try, I will not always be there to protect her, all I can do is pray that this mature way of handling crisis like a child will stay with her through all her life. 

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आज रात्रि जब प्रात:काल डिम्पल बाबा जागे, उनका हृदय नई ऊर्जा से प्रकाशमान था। कल ही काँग्रेस कार्यकारिणी ने उनकी तुलना किसी अचार से की थी और ध्वनिमत से सनातन धर्म का रक्षक बताया था। डिम्पल बाबा के बताया गया था कि अचार बनने के बाद हिंदू धर्म ध्वजा की रक्षा का दायित्व उन पर बैठता है। बाबा को खुद को पिकल कहा जाना पसंद तो नहीं आया था और वह जानना चाहते को अति उत्सुक थे कि ये हिंदू पिकल का इतना सम्मान क्यों करते हैं। हालाँकि डिम्पल बाबा के उत्साह का सबसे बड़ा कारण यह था कि ब्रह्मऋषि डिम्पल घोषित होने का बाद वह सामाजिक मर्यादाओं से इतर हो गए थे, और बक़ौल बाल ऋषि पूनावाला उन्हें भाँग गाँजा की निर्बाध व्यवस्था का अधिकार था। बालऋषि के अनुसार- राहुल जी इज जस्ट लाईक दैट डूड फ्राम माऊँटेन- शिव। सोच कर ही महर्षि डिम्पल के शरीर मे फुरेरियाँ उठी। नानी ने जब पवित्र वेटिकन के जल से ब्लेसित किया था तब उन्हें कहाँ भान होगा कि एक दिन उनका पौत्र हिंदू धर्म की दिशा तय करेगा। 
बहरहाल नव-नियुक्त ब्रह्मऋषि डिम्पल बाबा ने, घड़ी को देखा। बारह बज गए थे और प्रात: सूर्य वंदना का समय था। रोलेक्स राजर्षि को भी अब पहुँच…

लँगड का एमाराई

(Hindi Satire, inspired by immortal writing of late  Shri Shrilal Shukl and his legendary Novel- Rag Darbari)


लंगडवा एम आर आई करवाने का सोच रहा था। फिर सोचा पता नहीं मशीन कहाँ कहाँ से जुड़ी होगी।

खन्ना मास्टर लंगडवा के उहापोह को बड़े ध्यान से देख रहे थे। ग़रीब का कष्ट अमीर को सदा ही ध्यानाकर्षक लगता है। उसी में उसकी आत्मा का उद्धार और राजनीति का चमत्कार छुपा होता है। खन्ना मास्टर जवान और जोशीले थे। चमकीली वास्केट पहनते थे, और गंजहा की जगह ख़ुद को गंजावाला कहलाना पसंद करते थे।

गंजावाला अपना चश्मा लहराते बालों में धकेल कर, मनुहार के लहजे में बोले - “जाओ हो, काहे घबराते हो? कब तक वैद जी के पीछे घूमते रहेगे? क़स्बा क्लीनिक जा कर एमाराई करा लो।”

“हमको थोड़ा डर लग रहा है।”

लंगडवा गंजावाला के उत्साह से भयभीत हो गया। अमीर आदमी ग़रीब के सुख में अचानक रुचि लेने लगे तो अक्सर ग़रीब के लिए भय और भ्रम का कारण होता है। एक राजकुमार पहले उत्साहित हुए थे तो जवाँ मर्द कंबल और ट्राजिस्टर प्राप्त कर के लौटे थे। उसके बाद उनके घर कभी किलकारियाँ नही सुनाई पड़ी , बस मुफ़्त के रेडियो में बिनाका गीत माला सुनाई पड़ती…

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Biggest problem which Hinduism faces when it is being evaluated through the western prism of Abrahamic faith . I was watching a speech by Sadhguru where he mentioned a very critical defining feature of Hinduism. He says, unlike Western faiths, Hinduism did not place anyone at a pedestal where questions would not reach. Forget the Prophets and Masters, even Gods were received with affection and a list of questions. Nothing was ever beyond debate in Hinduism, not even Gods. This very nature of Hinduism has often been cause of concern and confusion for Western thinkers, troubled by a religion, which is seeped so deep into our culture of exploration of truth through investigation and examination. When the western scholars approach the Vedic Indian wisdom, oftentimes their approach itself is based on the assumption that they are approaching a civilization, a religion which is inferior to theirs. This makes it hard for them to accept a society which was an intellectually flourishing society…