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Self-doubt

I am not very sure of the age at which self-doubt first surfaces on the calm composure of a child's personality. When I look at my daughter, it is self-belief and the idea of happiness that drives all her efforts, which makes an observation of hers most engaging. A man is, to me it seems, all that he can be, at the beginning of his life. Her needs are so pure and straight-forward that any apology is therefore, out of place.
Happiness is the sole driver of her activities. She, the sweet child of tomorrow, has no qualms of pointing to my shoes and tell very clearly to my nephew who is trying to wear them that those belong to her father and he should wear those of his own. At half his height she would pull herslf up to all of her stature and make her point. And I do love her for that. By this simple act she throws out all norms of social appropriateness choking the true human feelings, and makes it more meaningful to me is that she thereby connects to me as an extension  to me, by what she believes is standing up for me. What saddens me is the thought of how so very soon in life, one kills this inner fight, bit by bit that one remains no longer capable of standing even by oneself, let alone by those one loves. We do know at times, that we are being treated totally shabbily and at times we treat even ourselves with scant respect. 
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कांग्रेस संत समागम - Congress Sant Samagam

आज रात्रि जब प्रात:काल डिम्पल बाबा जागे, उनका हृदय नई ऊर्जा से प्रकाशमान था। कल ही काँग्रेस कार्यकारिणी ने उनकी तुलना किसी अचार से की थी और ध्वनिमत से सनातन धर्म का रक्षक बताया था। डिम्पल बाबा के बताया गया था कि अचार बनने के बाद हिंदू धर्म ध्वजा की रक्षा का दायित्व उन पर बैठता है। बाबा को खुद को पिकल कहा जाना पसंद तो नहीं आया था और वह जानना चाहते को अति उत्सुक थे कि ये हिंदू पिकल का इतना सम्मान क्यों करते हैं। हालाँकि डिम्पल बाबा के उत्साह का सबसे बड़ा कारण यह था कि ब्रह्मऋषि डिम्पल घोषित होने का बाद वह सामाजिक मर्यादाओं से इतर हो गए थे, और बक़ौल बाल ऋषि पूनावाला उन्हें भाँग गाँजा की निर्बाध व्यवस्था का अधिकार था। बालऋषि के अनुसार- राहुल जी इज जस्ट लाईक दैट डूड फ्राम माऊँटेन- शिव। सोच कर ही महर्षि डिम्पल के शरीर मे फुरेरियाँ उठी। नानी ने जब पवित्र वेटिकन के जल से ब्लेसित किया था तब उन्हें कहाँ भान होगा कि एक दिन उनका पौत्र हिंदू धर्म की दिशा तय करेगा। 
बहरहाल नव-नियुक्त ब्रह्मऋषि डिम्पल बाबा ने, घड़ी को देखा। बारह बज गए थे और प्रात: सूर्य वंदना का समय था। रोलेक्स राजर्षि को भी अब पहुँच…

लँगड का एमाराई

(Hindi Satire, inspired by immortal writing of late  Shri Shrilal Shukl and his legendary Novel- Rag Darbari)


लंगडवा एम आर आई करवाने का सोच रहा था। फिर सोचा पता नहीं मशीन कहाँ कहाँ से जुड़ी होगी।

खन्ना मास्टर लंगडवा के उहापोह को बड़े ध्यान से देख रहे थे। ग़रीब का कष्ट अमीर को सदा ही ध्यानाकर्षक लगता है। उसी में उसकी आत्मा का उद्धार और राजनीति का चमत्कार छुपा होता है। खन्ना मास्टर जवान और जोशीले थे। चमकीली वास्केट पहनते थे, और गंजहा की जगह ख़ुद को गंजावाला कहलाना पसंद करते थे।

गंजावाला अपना चश्मा लहराते बालों में धकेल कर, मनुहार के लहजे में बोले - “जाओ हो, काहे घबराते हो? कब तक वैद जी के पीछे घूमते रहेगे? क़स्बा क्लीनिक जा कर एमाराई करा लो।”

“हमको थोड़ा डर लग रहा है।”

लंगडवा गंजावाला के उत्साह से भयभीत हो गया। अमीर आदमी ग़रीब के सुख में अचानक रुचि लेने लगे तो अक्सर ग़रीब के लिए भय और भ्रम का कारण होता है। एक राजकुमार पहले उत्साहित हुए थे तो जवाँ मर्द कंबल और ट्राजिस्टर प्राप्त कर के लौटे थे। उसके बाद उनके घर कभी किलकारियाँ नही सुनाई पड़ी , बस मुफ़्त के रेडियो में बिनाका गीत माला सुनाई पड़ती…

Women in Vedas - The Fake Story of Sati Pratha

Biggest problem which Hinduism faces when it is being evaluated through the western prism of Abrahamic faith . I was watching a speech by Sadhguru where he mentioned a very critical defining feature of Hinduism. He says, unlike Western faiths, Hinduism did not place anyone at a pedestal where questions would not reach. Forget the Prophets and Masters, even Gods were received with affection and a list of questions. Nothing was ever beyond debate in Hinduism, not even Gods. This very nature of Hinduism has often been cause of concern and confusion for Western thinkers, troubled by a religion, which is seeped so deep into our culture of exploration of truth through investigation and examination. When the western scholars approach the Vedic Indian wisdom, oftentimes their approach itself is based on the assumption that they are approaching a civilization, a religion which is inferior to theirs. This makes it hard for them to accept a society which was an intellectually flourishing society…