Skip to main content

Father's Thought for a Daughter on Goa Beach



समंदर
तुम्हारा अनंत विस्तार,
मानो क्षितिज से
वर्चस्व के युध्ध में
निरंतर रत है;
मेघ जैसे उतर आये हैं
बचपन के मित्र की तरह
तुम्हारे माथे के स्वेद बिन्दुओं को
पोछ देने को,
और सूरज जैसे कोई उत्सुक
राहरौ, माने ठिठक के
इस अनवरत अभियान को तक रहा हो
ना जीतने वाला है कोई उसका
न कोई हारने वाला|
थक कर थोड़ी देर में
अपनी राह चल देगा वोह
और चल देगा,
तुम्हारा दोस्त बादल
और तुम
यूँ ही उलझे रह जाओगे
इस अनवरत अभियान में
ना कोई हाथ थामेगा
न कोई रक्त पोछेगा|
बस एक नन्ही नदी
तेरी बेटी, अश्रु पूरित नेत्रों से
तुम्हें संघर्ष रत
तकती रहेगी, तुम्हारे पांव दाबेगी
तुम्हारा माथा चूमेगी
और अपनी राह में बटोरे
सारे दर्द, सारी हंसी, सारा प्यार
तुम्हारी छाती से लग कर
तुम्हें सब सौंप देगी,
और अपनी सब उदासी,
तुम्हारी खामोशी में गर्क कर देगी
और उस वक़्त, ये निरर्थक सा दीखने वाला अभियान
अटल एक अर्थ पा लेगा
जो तुम एक धरोहर पानी की
क्षितिज पे जीत की सूरत
उफक के हाँथ सौपोगे
जिसे वोह पर्वतों के पार जाकर
उसी नन्ही सी बेटी को,
निरंतरता की शक्ल सौंपेगा/
और तुम एक पर्वतों से टूटती
नन्हे प्रपात में
बह निकालोगे.

O Great Ocean
Your grand expanse
seem to be engaged
an unending, eternal
struggle for dominance,
against the Horizon
Looming over your being.
Clouds though have come down
like long lost friends of childhood
to wipe the sweat that appears on
your weary forehead.
And the Sun
as if a curious passer by
stands by to watch the eternal struggle,
with mere curousity
and no interest towards
the winner or the loser in this struggle;
will get bored and move on his way
So will your friend
Cloud will also go his way,
All you will be left with
will be a tiny rivulet
Your little daughter
with moist eyes,
will stay back ,
Massage your bruised knees,
and kiss your weary forehead,
And in your embrace
loose all that she had collected on the way
all the pain, laughter and love
and submerge all the sadness of the way
in her Father's silence
and it will be the moment,
when this seemingly
futile and needless struggle
will find a meaning, an eternal meaning
as you will put some water in
the custody of the Horizon so far,
A victor,
burdening him to carry it off to
far mountains,
as you render longetivity and
continuity to your daughter and life itself
when it will break into a
tiny stream in the mountains, after the rain.



 
2 comments

Popular posts from this blog

कांग्रेस संत समागम - Congress Sant Samagam

आज रात्रि जब प्रात:काल डिम्पल बाबा जागे, उनका हृदय नई ऊर्जा से प्रकाशमान था। कल ही काँग्रेस कार्यकारिणी ने उनकी तुलना किसी अचार से की थी और ध्वनिमत से सनातन धर्म का रक्षक बताया था। डिम्पल बाबा के बताया गया था कि अचार बनने के बाद हिंदू धर्म ध्वजा की रक्षा का दायित्व उन पर बैठता है। बाबा को खुद को पिकल कहा जाना पसंद तो नहीं आया था और वह जानना चाहते को अति उत्सुक थे कि ये हिंदू पिकल का इतना सम्मान क्यों करते हैं। हालाँकि डिम्पल बाबा के उत्साह का सबसे बड़ा कारण यह था कि ब्रह्मऋषि डिम्पल घोषित होने का बाद वह सामाजिक मर्यादाओं से इतर हो गए थे, और बक़ौल बाल ऋषि पूनावाला उन्हें भाँग गाँजा की निर्बाध व्यवस्था का अधिकार था। बालऋषि के अनुसार- राहुल जी इज जस्ट लाईक दैट डूड फ्राम माऊँटेन- शिव। सोच कर ही महर्षि डिम्पल के शरीर मे फुरेरियाँ उठी। नानी ने जब पवित्र वेटिकन के जल से ब्लेसित किया था तब उन्हें कहाँ भान होगा कि एक दिन उनका पौत्र हिंदू धर्म की दिशा तय करेगा। 
बहरहाल नव-नियुक्त ब्रह्मऋषि डिम्पल बाबा ने, घड़ी को देखा। बारह बज गए थे और प्रात: सूर्य वंदना का समय था। रोलेक्स राजर्षि को भी अब पहुँच…

लँगड का एमाराई

(Hindi Satire, inspired by immortal writing of late  Shri Shrilal Shukl and his legendary Novel- Rag Darbari)


लंगडवा एम आर आई करवाने का सोच रहा था। फिर सोचा पता नहीं मशीन कहाँ कहाँ से जुड़ी होगी।

खन्ना मास्टर लंगडवा के उहापोह को बड़े ध्यान से देख रहे थे। ग़रीब का कष्ट अमीर को सदा ही ध्यानाकर्षक लगता है। उसी में उसकी आत्मा का उद्धार और राजनीति का चमत्कार छुपा होता है। खन्ना मास्टर जवान और जोशीले थे। चमकीली वास्केट पहनते थे, और गंजहा की जगह ख़ुद को गंजावाला कहलाना पसंद करते थे।

गंजावाला अपना चश्मा लहराते बालों में धकेल कर, मनुहार के लहजे में बोले - “जाओ हो, काहे घबराते हो? कब तक वैद जी के पीछे घूमते रहेगे? क़स्बा क्लीनिक जा कर एमाराई करा लो।”

“हमको थोड़ा डर लग रहा है।”

लंगडवा गंजावाला के उत्साह से भयभीत हो गया। अमीर आदमी ग़रीब के सुख में अचानक रुचि लेने लगे तो अक्सर ग़रीब के लिए भय और भ्रम का कारण होता है। एक राजकुमार पहले उत्साहित हुए थे तो जवाँ मर्द कंबल और ट्राजिस्टर प्राप्त कर के लौटे थे। उसके बाद उनके घर कभी किलकारियाँ नही सुनाई पड़ी , बस मुफ़्त के रेडियो में बिनाका गीत माला सुनाई पड़ती…

Women in Vedas - The Fake Story of Sati Pratha

Biggest problem which Hinduism faces when it is being evaluated through the western prism of Abrahamic faith . I was watching a speech by Sadhguru where he mentioned a very critical defining feature of Hinduism. He says, unlike Western faiths, Hinduism did not place anyone at a pedestal where questions would not reach. Forget the Prophets and Masters, even Gods were received with affection and a list of questions. Nothing was ever beyond debate in Hinduism, not even Gods. This very nature of Hinduism has often been cause of concern and confusion for Western thinkers, troubled by a religion, which is seeped so deep into our culture of exploration of truth through investigation and examination. When the western scholars approach the Vedic Indian wisdom, oftentimes their approach itself is based on the assumption that they are approaching a civilization, a religion which is inferior to theirs. This makes it hard for them to accept a society which was an intellectually flourishing society…