Skip to main content

Posts

Showing posts from August, 2018

बुद्धिजीवियों की बारात

बुद्धिजीवियों की बारात
शरद जी रिटायर हो चुके थे। आधार का भय आधारहीन मान कर आधार बनवा चुके थे, और पेंशन प्राप्त कर के भोपाल मे जीवनयापन कर रहे थे। एक बार बिहार जा कर शरद जी नरभसा चुके थे, पुन: नरभसाने का कोई इरादा था नहीं, सो मामाजी के राज में स्वयं को सीमित कर के रखे हुए थे। इस्लाम आज कल ख़तरे मे नही आता था, संभवत: इमर्जेंसी के बाद से, इस्लाम सबल हो चुका था, और कल निपचती जींस और लोकतंत्र के ख़तरे मे रहने का दौर चल रहा था। न्यू मार्केट के कॉफ़ी हाऊस मे चंद बुद्धिजीवी लोकतंत्र पर आए संकट पर चर्चा कर लेते थे, जोशी जी वहाँ भी नहीं जाते थे। एक दफे वहाँ के मलियाली वेटर्स को जोशी जी के हिंदी लेखक होने का पता चल गया और उन्होंने जोशीजी को यिंदी यिम्पोजीशन के विरोध मे कॉफ़ी देने से मना कर दिया था। कहाँ शरदजी सरस्वती से ब्रह्मप्रदेश तक लिखना चाहते थे और कहाँ उन्हे बड़े तालाब के उत्तर भाग का लेखक घोषित कर दिया गया था। इस से क्षुब्ध जोशी जी अपने बग़ीचे मे टमाटर उगा रहे थे। जानने वाले कहते हैं कि इसके पीछे उनकी मँशा महान किसान नेता बन कर उभरने की थी, किंतु उन्हे पता चला कि आधुनिक किसान नेता किसानों को …

Remembering the Forgotten - On 15th of August

The year is 2018. It is 72 years since we made the tryst with destiny. Pt. Jawaharlal Nehru made that tryst with destiny, and as it turned out, with the passage of time it became a tryst with dynasty. The history was appropriated with a clinical precision. My intention is not to judge, or reduce the exalted stature of those who fought for the freedom and eventually came to believe that the nation they had emancipated is their fiefdom, and that the people of the nation are bound to remain indebted to them, in perpetuity, generation after generation, for their real  or imagined heroics of the past. 
Every independence day is marked by two things- perfunctory remembrance of the heroes of the past who could add to the glory of a pathetic polity of the present, a new tendency of the people to belittle the nation on the grounds that we are not the best nation in the world. The first category of people will appropriate the glory of the past, claiming the credit of all the good that is a part …