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Showing posts from September, 2020

पुस्तक समीक्षा - मैं मुन्ना हूँ - लेखक - मनीष श्रीवास्तव

जिसप्रकारवनस्पतिघीडालडाहोताहै, जैसेप्रतिलिपिज़ेरॉक्सहोतीहै, मनीषश्रीवास्तवजीश्रीमानजीहोतेहैं।कमलोगोंकोपाठकोंकाइतनास्नेहप्राप्तहोताहै, जोउनकेकृतित्वएवंलेखनसेआगेनिकलजाताहै।इसकाकारणउनकेलेखनमेंसत्यकाप्रतिबिम्बपरिलक्षितहोनाहोताहैजोपाठकनेउनकेव्यक्तित्वमेंदेखासुनाहो।लेखनमेरीदृष्टिमेंवहमाध्यमहोताहै जिसकेद्वाराअपनेसत्यकोवहकपोलकल्पनाकाआवरणपहनाकरसार्वजनिककरदेताहैऔरआत्माकोएकपिशाचकेबोझसेमुक्तकरपाताहै।कलमकेमाध्यमसेलेखकवहकहनेकासाहसजुटापाताहैजिसेअन्यथावहसंभवतःनकहपाए।जबकोईकृतियहकरपातीहैतोवहनकेवललेखककीआत्माकेपिशाचहटाती